पागल हूं, पागल ही रहने दो जिस दिन समझदार बन गया सह नहीं पाओगे |
जो मुझे समझ ना सका उसे हक़ है, की वो मुझे बुरा ही समझे..!!
इतना साफ़ मत रख अपने दामन को, लोग अगर गंगा समझ बैठे तो गंदा कर देंगे.
रोना उनके लिए जो तुम पर निशार हो, उनके लिए क्या रोना जिनके आशिक हजार हो |
कीमत खुद की गिर जाती है, किसी को किमती बनाने की चाह में |
फर्क पड़ता है इसलिये आज भी साथ हूँ, नहीं पड़ता तो कबका छोड़ दिया होता.
जो लोग जानते है बिछड़ जाने का दुःख, वो साथ बैठे परिंदों को उड़ाया नहीं करते.
सिर्फ तूने ही कभी मुझको अपना नहीं समझा, जमाना तो आज भी मुझे तेरा दीवाना कहता है.
पुरे की ख्वाहिश में ये इंसान बहुत कुछ खोता हैं ! भूल जाता है कि आधा चाँद भी खूबसूरत होता है .
तेरे साथ को तरसे , तेरी बात को तरसे, तेरे होकर भी.. तेरी एक मुलाकात को तरसे.
अंधेरो से कह दो बचपन गुजर चुका है अब तुझ से डर नहीं सुकून मिलता है
क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे, तेरे दर्द से, मुझे भी तकलीफ होती है |
कुछ ऐसे हो गए हैं इस दौर के रिश्ते, जो आवाज तुम ना दो तो बोलते वो भी नहीं।
स्कूल का वो बैग फिरसे थाम दे माँ, ऐ जिन्दगी का बोज उठाना मुश्किल है .
इंसान तारों को तब देखता है, जब ज़मीन पे कुछ खो गया हो
बता किस से करूं तेरी बेरूखी का शिकवा , मेरे शहर में हर शख्स तुझे मेरा समझता है..
न पाने की इच्छा न खोने का गम इश्क नहीं अब इबादत करेंगे हम
हर वक़्त मिलती रहती है मुझे अंजानी सी सज़ा , मैं कैसे पूछू तकदीर से मेरा कसूर क्या है
समय के साथ बदलने का हुनर तो हर कोई रखता है मज़ा तो तब आए जब वक़्त बदल जाए और इंसान ना बदले
दुनिया की सबसे बहतरीन दवाई है जिम्मेदारी एक बार पी लीजिये ज़िंदगी भर थकने नहीं देगी
ज़िन्दगी ज़न्नत है अगर हमसफ़र नाइक हो
हादसा बस इतना सा था कि अपनी बर्बादी को हम इश्क समझ बैठे.
लहरों से खेलना तो समंदर का खेल है, लगती है चोट कैसे ये किनारों से पूछो
मन ख्वाहिशों मे अटका रहा और ..जिंदगी हमें जी कर चली गई
पगली तेवर और जेवर संभाल कर रखने की चीज है, यू बात बात पर किसी को दिखाये नहीं जाते..💯💯
बस यूँ ही लिखने की कोशिश करती हूँ कुछ अपना पागलपन कुछ उसकी यादे लिखती हूँ 💙
दिल रोज पूछता है तुम्हारे बारे में और मैं रोज़ कहता हूं बस आते ही होंगे 🙃
उलझा हि रहने दे ..इन जुल्फो में, इनसे में निकला तो.. हवाओ का हो जाऊंगा..
पिचकारी की धार, गुलाल की बौछार अपनों का प्यार, यही है यारों होली का त्यौहार
ज़माना वफ़ादार नहीं तो क्या हुआ, धोखेबाज़ भी तो हमेशा अपने ही होते हैं!!
दिल तो ख़रीद लोगे जनाब ... पर उसमें इश्क़ कहा से लाओगे |
काश कोई हमे भी एसा चाहे, जैसे कोई तकलीफ में सुकून चाहता है..!!
एक बात बोलू ! सब कुछ मिलेगा जब रब राज़ी होगा...
ये शिकायत नहीं तजुर्बा है, कदर करने वालो की कोई कदर नहीं करता.
मैं अगर तुझे हार भी गया, तो तुम्हें जीतने वालों से ज्यादा खुश मिलूंगा..!!
शरीफ सिर्फ वो होते हैं मेरी जान, जिनके कारनामें पकड़े नहीं जाते.
तेरी खामोशी अगर तेरी मजबूरी है, तो रहने दे मेरी जान इश्क कौन सा जरूरी है |
आंखो को अक्सर वही चीज़ पसंद आती है, जिसका मिलना मुश्किल हो.
मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला, अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता।
तुझे याद कर लिया है आयत की तरह, अब तेरा ज़िकर होगा इबादत की तरह.
कभी तो कुछ वैसा हो जैसा मैंने सोचा हो |

जिंदगी में यह हुनर भी आजमाना चाहिए, जंग अगर अपनों से हो तो हार जाना चाहिए !!
अब तो वक़्त ही उसे बतायेगा, की कितने कीमती थे हम !!
ख़ामोशी भी इक नशा है, आज कल मैं नशे में हूं
संगत का जरा ध्यान रखना साहब, संगत आपकी खराब होगी बदनाम माँ-बाप और संस्कार होंगे .
मेरी यादों का असर है ये, तुम्हे हिचकियाँ यूँ बेवजह नही आती...
हमने तो इससे कही ज्यादा सहा है जिंदगी में, आपका हमसे मुहँ मोड़ जाना कोई बड़ी बात नही !
वो जो छोटी छोटी खुशिया होती है न बस वो तुम्हे देख कर पूरी हो जाती हैं
बिना स्वार्थ के किसी का भला करके देखिये आपकी सारी उलझनों को ईश्वर सुलझा देगा
अपनी ज़ुबान कि तेजी कभी उस माँ पर मत आजमाना जिसने तुम्हे बोलना सिखाया
आंखों से भी लिखी जाती है कुछ दास्तानें हर कहानी को कलम की जरूरत नहीं होती
हुनर झुकने का मुझ में भी बहुत है मगर.....! हर चौखट पर सजदा करुँ ये मुझे गवारा नहीं.......!!
जिन्दगी में कोई एक मिलता है लाखो में...जो बिन कहे सारे दर्द पढ़ ले आँखों में.....
मुझे गिरे हुए पत्तों ने सिखाया है, बोझ बन जाओगे तो अपने भी गिरा देंगे💯
धुएँ ने भी ढूंढ लिया है अपना वजूद, पहले खुद को खो कर फिर हवा का होकर...🤞💪
तू मुझे "अपना" बना या ना बना, तेरी खुशी तू जमाने में मेरे नाम से,तो "बदनाम" है 🙃
तन्हाईयाँ कहती हैं कोई महबूब बनाया जाए, ज़िम्मेदारियाँ कहती हैं वक़्त बर्बाद बहुत होगा !
इश्क़ उसी से करो जिसमें खामियाँ बेशुमार हों , ये खूबियों से भरे चेहरे इतराते बहुत हैं.
बूरा वक़्त भी क्या कमाल का होता है साहब, जी जी करने वाले भी तू तू करने लगते हैं.
तुमसे अच्छे तो मेरे दुश्मन निकले, हर बात पे कहते है तुझे नहीं छोड़ेगें..
अपने किरदार पर डालकर पर्दा, हर कोई कह रहा है जमाना खारब है |
अगली बार जब मिलो तो हाथ ना मिलाना क्योंकि तुम थाम नहीं पाओगे और मैं छोड़ नहीं पाऊंगा |
हुसन खुदा ने दिया था, आशिक हम हो गये, नसीब किसी और का था, और बर्बाद हम हो गये.
सोचो तो आप बिल्कुल अकेले हो... ठीक से सोचों तो यही सत्य है...
"हालात" कह रहे हैं मुलाकात "मुमकिन" नहीं, "उम्मीद" कह रही है थोड़ा "इंतज़ार" कर !
सिर्फ प्यार करना काफ़ी नहीं है, कुछ बनना भी पड़ता है ज़िन्दगी में इश्क़ पाने के लिए.
अजीब बात है ना साहब, आँसू छुपाने के लिए मुस्कुराहट ही काम आती है..
उस मोड़ से शुरू करनी है फिर से जिंदगी जहा सारा शहर अपना था और तुम अजनबी
मेरे हिस्से से ज्यादा तूने मेरी थाली में परोसा है कितनी भी मुश्किल आ जाएं भगवान मुझे तुझ पर भरोसा है
मुसाफिर कल भी था मुसाफिर आज भी हूं , कल अपनों की तलाश में था आज अपनी तलाश में हूं
हमेशा सोच समझ के बोलिए क्योंकि बोलने से पहले शब्द आपके गुलाम होते है और बोलने के बाद आप शब्द के.
प्यार में ताकत है दुनिया को झुकाने की, वर्ना क्या ज़रूरत थी राम को शबरी के जूठे बेर खाने की !
भरोसा करना आना चाहिये !!🧐 शक की क्या है वो👑❤️ जमाना करता है !🔥
हर पल जिन्दगी का अब बस धुआँ है न जाने सुकून-ए जिन्दगी अब कहां है। ✨✨
मेरी ज़िन्दगी के अनगिनत है वाकिये!! ये समझ नही आता कोई कहानी लिख डालू या इसका हिसाब लिख डालू.📝
जमीर बेच कर अमीर बन जाना इससे बहेतर है फ़कीर बन जाना.💯
एक ही बात सिखता हूं मैं रंगो से, अगर निखरना है तो बिखरना जरूरी है 💯💯
जो ज़ाहिर करना पड़े वो दर्द कैसा और जो दर्द ना समझ सके वो हमदर्द कैसा.
मेरे मुकद्दर में तो तेरी यादें है तू जिसका मुकद्दर है जिंदगी उसे मुबारक.
छोटे थे तो सब नाम से बुलाते थे बड़े हुए तो बस काम से बुलाते है |
फ़िक्र बता रही है मोहब्बत जिन्दा है फासलों से कह दो खुद पर गुरुर ना करें |
सच बोलते हैं इसलिये जहर लगते हैं, झूठ बोलते तो लोग वाह-वाह करते.
उसने आज पूछा आप के मन मैं क्या है, हम आज भी नहीं कह पाए कि तुम |
अजीब खेल है ये मोहब्बत का किसी को हम न मिले कोई हमें ना मिला |
सुकून और इश्क वो भी एक साथ, रहने दो गालिब कोई अकल की बात करो..
किसी को गलत समझने से पहले, उसके हालात समझ लिया करो |
कदर करना सीख लो साहब, मोहब्बत बार-बार नहीं मिलती.
मजबूर कर देती है जिंदगी साहब वरना मौत किसे पसंद है
अंदाज मुझे भी आता है नज़र अंदाज करने का पर तू तकफ़ील से गुजरे ये मुझे गवारा नहीं |

तुम खास थे इसलिए लड़े तुमसे, पराये होते तो मुस्कुरा कर जाने देते ...
काश तकदीर भी जुफलों की तरह होती, जब जब बिखरती तब तब सवार लेते.

कुदरत का केहर भी ज़रूरी है साहेब, हर कोई खुद को खुदा समझने लगा था.
क्या लिखूं तेरी तारीफ-ए-सूरत में यार, अल्फ़ाज़ कम पड़ रहे हैं तेरी मासूमियत देखकर |
नाराज़गी भी एक खूबसूरत रिश्ता है, जिससे होती है वो दिल और दिमाग दोनों में रहता है.
इंसान दो लोगों से हमेशा हार जाता हैं, एक अपने परिवार से दूसरा अपने प्यार से.
ऐसा नही है कि मुझमे कोई 'ऐब' नही है, पर सच कहता हूँ मुझमें कोई 'फरेब' नहीं है |
ईशक का ईलम सिखने गया था और लोगों के चेहरे पढ़ना सिख कर लौटा हूं
ठोकर खाया हुआ दिल है साहब भीड़ से ज्यादा तन्हाई अच्छी लगती है
कुछ रिशते ऐसे होते हैं..जिनको जोड़ते जोड़ते इन्सान खुद टूट जाता है।