वो सिर्फ मेरी थी, लेकिन सिर्फ मेरे सामने

55

हम रिश्ते कम बनाते है मगर दिल से निभाते है

129

बहुत करीब आकर बताया उसने कि तुम्हारा नहीं हूं मैं....

185

याद करोगे एक दिन मुझे ये सोच कर की क्यों नहीं कदर की मैंने उसके प्यार की

201

पता है तकलीफ क्या है किसी को चाहना फिर उसे खो देना और खामोश हो जाना

193

कभी मौका मिले तो सोचना ज़रूर कि एक लापरवाह शख़्स तेरी इतनी परवाह क्यूं करता है

223

हमने तो एक ही शख्स पर चाहत खत्म कर दी अब मोहब्बत किसे कहते हैं हमे मालूम नहीं

143

हमे नहीं आता दर्द का दिखावा करना बस अकेले रोते हैं और सो जाते हैं

127

जब तेरी याद आती है ना आँखे तोह मान जाती है पर यह कम्बख्त दिल रो पड़ता है

98

हमारा उसका अब रिश्ता न पूछो तालुक तो है मगर टुटा हुआ है

147

समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से, अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी

263

खुश हो ना हमारा प्यार अधूरा रह गया.. पर तेरा टाइमपास पूरा हो गया ..

834

जिस दिल में तेरा नाम बसा था हमने वो दिल तोड़ दिया ना होने दिया बदनाम तुझे तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया

458

शक करना गलत था पर शक बिलकुल सही था

794

वो जो कल रात चैन से सोया हैं , उसको खबर भी नहीं कोई उसके लिए कितने रोया हैं..

297

आवाज़ नहीं होती दिल टूटने की. लेकिन तकलीफ बहुत होती हैं.

183

मत करो उसके मैसेज का इन्तजार जो ऑनलाइन तो है पर किसी और के लिया..

516

लोग कहते हैं समझो तो खामोशियाँ भी बोलती हैं , मैं अर्सों से खामोश हूँ वो बरसों से बेखबर है

150

मिल सके आसानी से उसकी खवाहिश किसे है , ज़िद्द तो उसकी है जो मुक्कदर में लिखा ही नहीं है

133

अगर किसी दिन तुम्हें रोना आए तो कॉल जरूर कर लेना, हंसाने की गारंटी तो नहीं लेता पर तेरे साथ जरूर रहूंगा

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क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?

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नहीं मिलेगा तुझे कोई हम सा, जा इजाजत है ज़माना आजमा ले !!

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कोई भी रिश्ता अधूरा नहीं होता , बस निभाने की चाहत दोनों तरफ होनी चाहिए।

1 K

चाह कर भी उनका हाल नहीं पूछ सकते डर है कहीं कह ना दे कि ये हक्क तुम्हे किसने दिया

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जो बीत गया सो बीत गया…आने वाला सुनहरा कल है वो…..मैं कैसे भुला दूँ दिल से उसे… मेरी हर मुश्किल का हल है वो

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एक खूबसूरत सा रिश्ता यूँ खतम हो गया..हम दोस्ती निभाते रहे…..और उसे इश्क हो गया

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क्या खूब मजबूरियां थी मेरी भी अपनी ख़ुशी को छोड़ दिया ” उसे ” खुश देखने के लिए

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मुझे फरक नहीं पड़ता,,,,अब क़समें खाओ या जहर..!!

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अब अगर तुम जाने ही लगे हो तो पलट कर मत देखना, *क्योकि मौत की सजा लिखने के बाद कलम तोड़ दी जाती है*

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बेवजह इंतज़ार

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ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है..तो मेरा लहू लेले....यू कहानिया अधूरी न लिखा कर।

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ना चाँद अपना था और ना तू अपना था ...!! काश दिल भी मान लेता की सब सपना था

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