दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं

जरा मुस्कुरा के देखो, दुनिया हँसती नजर आएगी

कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये

लोग केहते है की मेरे दोस्त कम है लेकीन, वोह नही जानते की मेरे दोस्तो मे कीतना "दम" हैं

तू इतना भी बेहतरीन नही , जिस के लिऐ मै खुद को गिरा दूं !

हमारी ताकत का अंदाजा हमारे जोर से नही..दुश्मन के शोर से पता चलता है

समन्दर की तरह है हमारी पहचान ऊपर से खामोश और अंदर से तूफान

हमे खो दोगे तो पछताओगे बहुत, ये आखरी गलती जरा सोच समझकर करना…

हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है

मेरे बारे में इतना मत सोचना , दिल में आता हु , समज में नही

आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके

पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।

हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर , खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!

शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते

दुनिया क्या सोचेगी ये मै कभी नहीं सोचता

हमारे जिँदगी की कहानी कूछ ऐसी है जिसमे Hero भी हम और Villain भी हम

मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं

मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं, मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

हम तो दिलके बादशाह हैं, जो सुनते भी दिल की है, और करते भी दिल की है

अपुन की जिंदगी ताश के इक्के की तरह हे , जिसके बगेर रानी और बादशाह भी अधूरे हे

जी भर गया है तो बता दो हमें इनकार पसंद है इंतजार नहीं

खेल ताश का हो या जिंदगी का , अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो

इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं

हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं , किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं

बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें , खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं

तू मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे… अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...

न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम

ऐसा कोई शहर नहीं, जहा अपना कहर नहीं, ऐसी कोई गली नहीं जहा अपनी चली नहीं